ज़िंदगी का सफर - 💞हमसफ़र के साथ💞 "भाग 3"
शाम को किआरा की मुँह दिखाई की रश्म रखी गई थी तो सभी उसकी तैयारियां करने लगे, सुमित्रा जी ने आध्या और आन्या से कहकर इवान और किआरा को तैयार होने के लिए बोल दिया था तो दोनो तैयार होने लगे, सुमित्रा जी ने किआरा को साड़ी और गहने देकर गई थी तो किआरा ने वही पहने ।
जब सभी औरते आ गई तब आन्या और आध्या ने किआरा का चेहरा घूंघट से ढक दिया और उसे अपने साथ नीचे ले आई, और जाकर सोफे पर बैठा दिया और दोनो उसके साइड बैठ गई

सबसे पहले इवान की दादी ने किआरा के चेहरे से घुंघट हटाया और उसे नेक दिया, बारी बारी से सभी ने किआरा का चेहरा देखा और उसे नेक दिया और आपस में बाते करने लगी, एक औरत बोली
औरत :- सुमित्रा बहन आपने तो इस बार भी हीरा चुन कर लाई है बिल्कुल चांद के टुकड़े जैसी है आपकी बहु, लेकिन इस चांद में भी एक दाग़ है
सुमित्रा जी :- मैं समझी नहीं लीला बहन आप कहना क्या चाहती है
लीला :- हमने सुना है की आपकी बहु बाँझ है, और आपके बेटे के तो पहले से ही दो बच्चे है इसलिए तो आप एक बाँझ लड़की को अपने घर ले आई वरना कौन ऐसी माँ होगी जो एक बाँझ लड़की को अपने बेटे के लिए चुने
लीला की बात सुनकर किआरा को बुरा लगा पर उसे पता था की ये वो कड़वा सच है जिसे बदला नहीं जा सकता है इसलिए उसे सुनने की आदत तो डालना ही पड़ेगा
लेकिन सुमित्रा जी को उनकी बाते बुरी लगी, क्युकी वो भी एक औरत है और वो किआरा का दर्द समझ सकती थी इसलिए उन्हे अच्छा नहीं लगा और वो अंदर चली गई
उन्हे अंदर जाता देख लीला फिर बोली
लीला :- अरे सुमित्रा बहन मैने तो सच ही कहा था अब आपको बुरा लगा तो माफ़ करियेगा, लेकिन इससे ये सच थोड़ी बदल जायेगा की आपकी बहु बाँझ है
फिर अपने बगल में बैठी औरत से बोली
लीला :- लो बहन सच बोल दिया तो इतना बुरा लग गया की उठकर ही चली गई, सच की तो कोई कीमत ही नहीं है
लेकिन तभी सुमित्रा जी आई, उनके हाथ इवान के दोनो बच्चे थे, वो किआरा के पास आई और उसकी गोद में दोनो बच्चों को देते हुए किआरा से बोली
सुमित्रा जी :- लो बेटा सम्भालो अपने बच्चों को, दोनो अभी उठ गये थे रो रहे थे मैने आवाज सुनी तो लेने चली गई
किआरा ने नम आँखों से उनसे दोनो बच्चों को लिया और दोनो को प्यार से खिलाने लगी तो सुमित्रा जी लीला और बाकी औरतो की तरफ देखते हुए बोली
सुमित्रा जी :- आपसे किसने कहा लीला बहन की मेरी बहु बाँझ है, वो देखो ( किआरा की तरफ इशारा करके ) मेरी बहु के तो दो इतने प्यारे बच्चे है ( थोड़े गुस्से से ) लीला बहन मेरी बहु बाँझ नहीं है समझी आप बाँझ आपकी सोच है, आप एक औरत होकर दूसरी औरत के लिए ऐसा बोल कैसे सकती है, मैने भी सुना था की आपकी बहु ने बच्चा गिरा दिया था क्युकी उसे इतनी जल्दी माँ नहीं बनना था तो क्या मैने आपसे उस बारे में कुछ कहा नहीं ना तो आपको कोई हक नहीं है मेरी बहु के बारे मैं गलत बोलने का, अगर आपको या किसी और को मेरी बातो का बुरा लगा हो तो माफ़ करना लेकिन ये भी सच ही है की एक औरत ही दूसरी औरत को नीचा दिखाती है, अगर नीचा दिखाने की जगह उसका साथ दे देगी आप तो आपका कुछ गलत नहीं होगा, अगर आपको अब भी ऐसी ही सोच रखनी है तो आप जा सकती है, मैं अपने घर में उन लोगो को पल भर भी नहीं रुकने दे सकती जो मेरी ही बहु के लिए ऐसा कहे ।
इतना कहकर सुमित्रा जी किआरा की तरफ देखते हुए उसके सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए बोलती है
सुमित्रा जी :- किआरा बेटा अब अगर तुम्हे कोई भी शख्स बाँझ बोले तो तुम गर्व से बोलना की तुम बाँझ नहीं हो तुम्हारे दो बच्चे है
किआरा नम आँखों से सुमित्रा जी तरफ देखते हुए हा में सर हिला देती है और माँ बोलते हुए सुमित्रा जी के बैठे बैठे ही गले लग जाती है क्युकी उसकी गोद में दोनो बच्चे थे
सुमित्रा जी प्यार से किआरा के आँशु साफ करते हुए उसके माथे को चूम लेती है और बोलती है
सुमित्रा जी :- मेरी बहु लाखो में एक है ऐसी बहु नसीब बालो को मिलती है, मैं बहुत ख़ुश क़िस्मत हु की मुझे तुम मिली बेटा
लीला जी को अपनी गलती का एहसास होता है, उन्हे समझ नहीं आता की वो किस मुह से माफ़ी मांगे
थोड़ी देर बाद एक पड़ोस की औरत सरिता बोलती है
सरिता :- सुमित्रा बहन जरा बहु से एक भजन गाने को कहिये ना हम भी सुने आपकी बहु की आवाज
सुमित्रा जी :- जरूर सरिता बहन हमारी बहु बहुत अच्छा गाती है, वो जरूर गाएगी ( किआरा की तरफ देखकर ) गाओगी ना बेटा
किआरा :- जी माजी जरूर
किआरा भजन गाना शुरु करती है तो सभी औरते उसकी आवाज सुनकर मन्त्रमुग्ध हो जाती है
इवान जो अपने रूम में बैठा हुआ था वो भी अपने रूम से बाहर आकर नीचे हॉल में बैठी किआरा को भजन गाते हुए सुनता है
इक बार तो राधा बनकर देखो मेरे साँवरिया,
राधा यूं रो रो कहे....
क्या होते हैं आंसू,
क्या पीड़ा होती है,
क्यूँ दर्द उठता है,
क्यूँ आँखे रोती है,
इक बार आंसू तो बहा कर देखो साँवरिया,
राधा यूं रो रो कहे....
( लोगों की कड़वी बाते सोचकर की सभी लोग उसे कैसे ताने देते थे बाँझ होने के लिए, सिर्फ सभी लोग ही नहीं उसकी माँ भी, ये सोच उसकी आँखे नम हो जाती है और वो आगे गाती है )
जब कोई सुनेगा ना तेरे मन के दुखड़े,
जब ताने सुन सुन कर होंगे दिल के टुकड़े,
इक बार जरा तुम ताने सुनकर देखो साँवरिया,
राधा यूं रो रो कहे....
(अपनी माँ की कड़वी बाते याद कर और ये सोचकर की वो उनकी अपनी बेटी नहीं थी इसलिए वो कैसे रुखा बर्ताव करती थी उससे )
क्या जानोगे मोहन तुम प्रेम की भाषा,
क्या होती है आशा,
क्या होती निराशा,
इक बार जरा तुम प्रेम करके देखो साँवरिया,
राधा यूं रो रो कहे....
पनघट पे मधुबन में वो इन्तजार करना,
कहे श्याम तेरे खातिर वो घुट घुट के मरना,
इक बार किसी का इन्तजार कर देखो साँवरिया,
राधा यूं रो रो कहे....
इक बार तो राधा बनकर देखो मेरे साँवरिया,
राधा यूं रो रो कहे....
राधा यूं रो रो कहे....
किआरा की आवाज में उसका दर्द बया हो रहा था, उसका भजन सुनकर सभी की आँखे नम हो गई थी, ऊपर खड़े इवान की भी आँखे नम हो गई थी, वो वापस अपने रूम में चला गया और बालकनी में आँखे बंद करके खड़ा हो गया
To be continued................
Prashant Chouhan
11-Nov-2022 06:10 PM
Nice chapter 😍
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Miss Chouhan
11-Nov-2022 11:14 AM
Nice story😊😊😊
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Seema Priyadarshini sahay
10-Oct-2022 06:21 PM
बहुत खूबसूरत
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